NEET से SSC GD तक… पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों का सैलाब! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
NEET से SSC GD तक… पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों का सैलाब! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
देश की राजधानी दिल्ली में आज ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं की भारी भीड़ जुटी हुई है। हाथों में तख्तियां, चेहरों पर कॉकरोच मास्क और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बुलंद होती आवाजें कई बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।
क्या सोशल मीडिया से शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP की मुहिम अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले रही है? क्या NEET, SSC GD और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने युवाओं का सब्र तोड़ दिया है? और क्या यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है?
हम बात कर रहे हैं दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे उस प्रदर्शन की, जहां देशभर से आए छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर एकजुट हुए हैं।
जिस सोशल मीडिया पेज को कुछ समय पहले तक लोग केवल एक मीम पेज समझते थे, उसने बेहद कम समय में लाखों युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आज 6 जून को उसी डिजिटल अभियान का असर दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिखाई दे रहा है। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दिपके अमेरिका से दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल का झंडा या बैनर लेकर न आएं और केवल तिरंगे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।
जंतर-मंतर पर पहुंचे छात्रों का कहना है कि उनका विरोध किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
इस आंदोलन को उस समय और ज्यादा चर्चा मिली जब लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षक सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंच गए। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदर्शन करना पसंद नहीं है, लेकिन जब बात बच्चों के भविष्य और न्याय की हो तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है। उनके मंच पर पहुंचने के बाद वहां मौजूद छात्रों में उत्साह का माहौल देखने को मिला और कई छात्रों ने उनके समर्थन में नारे भी लगाए।
वहीं प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों और छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाले मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। छात्रों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और स्थायी सुधार चाहते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि युवाओं का यह आक्रोश केवल NEET, SSC GD या किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की व्यापक मांग का प्रतीक है। उनका दावा है कि देशभर के लाखों छात्र इस मुद्दे से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं और अब अपनी आवाज को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाना चाहते हैं।
उधर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के जवान बड़ी संख्या में जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में तैनात किए गए हैं। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और चेकिंग की व्यवस्था की गई है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोशल मीडिया से शुरू हुई यह मुहिम देश की शिक्षा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव का कारण बनेगी? क्या छात्रों की यह आवाज सरकार और नीति-निर्माताओं तक पहुंचेगी? और क्या यह आंदोलन आने वाले समय में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई राष्ट्रीय बहस की शुरुआत करेगा?
फिलहाल देशभर की निगाहें दिल्ली के जंतर-मंतर पर टिकी हुई हैं, जहां जुटे युवा अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।
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